| Song: | Tumhe Dillagi Bhool Jani Padegi |
| Singer(s): | Nusrat Fateh Ali Khan |
| Musician(s): | Nusrat Fateh Ali Khan |
| Written by: | Nusrat Fateh Ali Khan |
| Label(©): | T-Series |
Tumhe Dillagi Bhool Jani Padegi Lyrics
Tumhen dil lagi bhool jani padegiMuhabbat ki rahon mein aa kar to dekhoTadapane pe mere na phir tum hasogeKabhi dil kisi se laga kar to dekho
Wafaon ki humse tawwaqo nahin haiMagar ek baar aazamaa kar to dekhoZamaney ko apanaa banaa kar to dekhaHamey bhi tum apana banaa kar to dekhoKhuda ke liye chor do abb yeh pardaKe hain aaj hum tum nahi ghair koiShab—e—vasl bhi hai hijaab iss khadr kyunZara rukh se aanchal utha kar to dekhoJafa’ein bahut ki bahut zulm DhayeKabhi ek nigah—e—karam iss taraf bhiHamesha huey dekh kar mujh ko barhamKisi din zara muskura kar to dekho
Jo ulfat mein har ek sitam hai gawaraYeh sab kuch hai paas—e—wafa tumse warnaSataatey ho din raat jis tarah mujh koKisi ghair ko yun sataakar to dekhoAgar’chey kisi baat per woh khafa hainTo acha yehi hai tum apni sahi karloWoh maaney na—maaney yeh marzi hai unkiMagar unko ‘PURNAM’ manaa kar to dekho
Tumhe Dillagi Bhool Jani Padegi Lyrics In Hindi
तुम्हें दिल लगी भूल जानी पड़ेगी
मुहब्बत की राहों में आ कर तो देखो
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे
कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
वफ़ाओं की हमसे तव्वाको नहीं है
मगर एक बार आज़माया कर तो देखो
ज़माने को अपना बना कर तो देखा
हमी भी तुम अपना बना कर तो देखो
खुदा के लिए चोर दो अब ये परदा
के हैं आज हम तुम नहीं घर कोई
शब—ए—वस्ल भी है हिजाब इस ख़दर क्यों
जरा रुख से आंचल उठा कर तो देखो
जफ़ाऐं बहुत की बहुत ज़ुल्म ढाये
कभी एक निगाह—ए—करम इस तरफ भी
हमेशा हुए देख कर मुझ को बरहम
किसी दिन जरा मुस्कुरा कर तो देखो
जो उल्फत में हर एक सितम है गवारा
ये सब कुछ है पास—ए—वफ़ा तुमसे वरना
सताते हो दिन रात जिस तरह मुझ को
किसी घर को यूं सतर्क तो देखो
अगर’चे किसी बात पर वो ख़फ़ा हैं
तो अच्छा यही है तुम अपना सही करो
वो माने ना—माने ये मर्जी है उनकी
मगर उनको ‘पूर्णम’ मना कर तो देखो
मुहब्बत की राहों में आ कर तो देखो
तड़पने पे मेरे ना फिर तुम हसोगे
कभी दिल किसी से लगा कर तो देखो
वफ़ाओं की हमसे तव्वाको नहीं है
मगर एक बार आज़माया कर तो देखो
ज़माने को अपना बना कर तो देखा
हमी भी तुम अपना बना कर तो देखो
खुदा के लिए चोर दो अब ये परदा
के हैं आज हम तुम नहीं घर कोई
शब—ए—वस्ल भी है हिजाब इस ख़दर क्यों
जरा रुख से आंचल उठा कर तो देखो
जफ़ाऐं बहुत की बहुत ज़ुल्म ढाये
कभी एक निगाह—ए—करम इस तरफ भी
हमेशा हुए देख कर मुझ को बरहम
किसी दिन जरा मुस्कुरा कर तो देखो
जो उल्फत में हर एक सितम है गवारा
ये सब कुछ है पास—ए—वफ़ा तुमसे वरना
सताते हो दिन रात जिस तरह मुझ को
किसी घर को यूं सतर्क तो देखो
अगर’चे किसी बात पर वो ख़फ़ा हैं
तो अच्छा यही है तुम अपना सही करो
वो माने ना—माने ये मर्जी है उनकी
मगर उनको ‘पूर्णम’ मना कर तो देखो

