bistirno parore lyrics

Bistirno parore lyrics | Best 20 of Bhupen Hazarika |

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Bistirno parore lyrics 

  • Singer : bhupen hazarika 
  • Lyrics By : नरेन्द्र शर्मा (हिन्दी)
    Performed By : भूपेन हज़ारिका, कविता कृष्णमूर्ति, हरिहरन, शा

Bistirno parore lyrics in Hindi

बिस्तिर्नो पारोरे, अशंख्य जोनोरे  

हाहाकार खुनिऊ निशोब्दे निरोबे 

बुढ़ा लुइत तुमि, बुढ़ा लुइत बुआ कियो ?

[विस्तार है आपार, प्रजा दोनों पार

करे हाहाकार निःशब्द सदा

ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ?] x 2

नैतिकता नष्ट हुई, मानवता भ्रष्ट हुई
निर्लज्ज भाव से बहती हो क्यूँ ?
इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा 
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ? 

अनपढ़ जन, अक्षरहिन
अनगीन जन, खाद्यविहीन
नेत्रविहीन दिक्षमौन हो क्यूँ ? 

इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा 
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ?

व्यक्ति रहे व्यक्ति केंद्रित
सकल समाज व्यक्तित्व रहित
निष्प्राण समाज को छोड़ती न क्यूँ ? 

इतिहास की पुकार, करे हुंकार
ओ गंगा की धार, निर्बल जन को
सबल-संग्रामी, समग्रोगामी
बनाती नहीं हो क्यूँ ?

विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार निःशब्द सदा 
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ?

रुदस्विनी क्यूँ न रहीं ?
तुम निश्चय चितन नहीं
प्राणों में प्रेरणा देती न क्यूँ ? 
उनमद अवमी कुरुक्षेत्रग्रमी
गंगे जननी, नव भारत में
भीष्मरूपी सुतसमरजयी जनती नहीं हो क्यूँ ? 

[विस्तार है अपार, प्रजा दोनों पार
करे हाहाकार, निःशब्द सदा 
ओ गंगा तुम, गंगा बहती हो क्यूँ ? ]x3
ओ गंगा तुम, ओ गंगा तुम 
गंगा तुम, ओ गंगा तुम 
गंगा… बहती हो क्यूँ ?


Bistirno parore Lyrics in Assamese

বিস্তীৰ্ণ পাৰৰে
অসংখ্য জনৰে
হাঁহাকাৰ শুনিও
নিঃশব্দে নিৰৱে
বুঢ়া লুইত তুমি
বুঢ়া লুইত বোৱাঁ কিয়?নৈতিকতাৰ স্খলন দেখিও
মানৱতাৰ পতন দেখিও
নিৰ্লজ্জ অলসভাৱে বোৱাঁ কিয়?জ্ঞানবিহীন নিৰক্ষৰৰ
খাদ্যবিহীন নাগৰিকৰ
নেতৃবিহীনতাত নিমাত কিয়?সহস্ৰ বাৰিষাৰ
উন্মাদনাৰ
অভিজ্ঞতাৰে
পংগু মানৱক
সবল সংগ্ৰামী,
আৰু অগ্ৰগামী
কৰি নোতোলা কিয়?ব্যক্তি যদি ব্যক্তিকেন্দ্ৰিক
সমষ্টি যদি ব্যক্তিত্বৰহিত
তেনে শিথিল সমাজক নাভাঙা…কিয়?

তুমিয়ে যদি ব্ৰহ্মাৰে পুত্ৰ
সেই পিতৃত্ব তেনে নাম মাত্ৰ
নহ’লে প্ৰেৰণা নিদিয়া কিয়?উন্মত্ত ধৰাৰে
কুৰুক্ষেত্ৰৰে
শৰশয্যাতে
আলিঙ্গন কৰা
ভীষ্মৰূপী
অজস্ৰ বীৰক
জগাই নোতোলাঁ কিয়?

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